Wednesday, December 16, 2009

तुझको अपना बना के देख लिया

खुद को यूं आजमा के देख लिया
तुझको अपना बना के देख लिया

रात के बाद दिन भी आता है
जागी रातें बिता के देख लिया

सैकड़ों फूल रोशनी के खिले
किसने चिलमन हटा के देख लिया

उसका दामन न उसके हाथ में है
लाख आंसू बहा के देख लिया

रोते रोते यूं हंस पड़ा ‘ज़ाहिद’
जैसे सब कुछ लुटा के देख लिया

8 comments:

  1. खुद को यूं आजमा के देख लिया
    तुझको अपना बना के देख लिया
    bahut khoob bahut achchhi rachna

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  2. रोते रोते यूं हंस पड़ा ‘ज़ाहिद’
    जैसे सब कुछ लुटा के देख लिया
    Waah! kya baat hai!

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  3. रात के बाद दिन भी आता है
    जागी रातें बिता के देख लिया

    सैकड़ों फूल रोशनी के खिले
    किसने चिलमन हटा के देख लिया

    behad ashavadi drishtikon . Achchhi baat.

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  4. उसका दामन न उसके हाथ में है
    लाख आंसू बहा के देख लिया

    Wahwwahh!

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  5. सैकड़ों फूल रोशनी के खिले
    किसने चिलमन हटा के देख लिया
    हमेशा की तरह एक बेहतरीन ग़ज़ल

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  6. उसका दामन न उसके हाथ में है
    लाख आंसू बहा के देख लिया

    रोते रोते यूं हंस पड़ा ‘ज़ाहिद’
    जैसे सब कुछ लुटा के देख लिया

    waah! waah!! waah!!!!!

    Kya khoob kaha hai!Waah!

    sadagi ..sanjidagi ..waah!

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