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Sunday, October 10, 2010

चल किसी मोड़ पर चराग़ रखें

10.10.10. की शुभकामनाओं के साथ...


हक़ीम हो के जो दवा मांगे
गो कि तूफान भी हवा मांगे ।/1/

दिल मेरा चांद सितारे मांगे
मांग बेज़ा सही ,रवा मांगे ।/2/

रात की नीमजान खामोशी
गूंगे आकाश से सबा मांगे ।/3/

मेरी तन्हाइयों की परछाईं-
मेरी मायूसियां ,वबा मांगे ।/4/

चल किसी मोड़ पर चराग़ रखें
फ़िक्र में ख्वाहिशें कबा मांगे ।/5/

दुखती रग पर न कोई हाथ रखे
यक़ीन टूटे हैं ,ख़बा मांगे ।/6/

आज ‘ज़ाहिद’ से क्यों उमीदेवफ़ा
भूली बिसरी हुई नवा मांगे ? ।/7/

01.08.10

शब्दावली
बेज़ा = अपूरणीय , अनुचित ,
रवा = बजा , उचित , ठीक
सबा = सुबह की सुगंधित हवा, प्रातःसमीर ,
नीमजान = अर्द्धप्राण , अधमरी ,
वबा = महामारी ,क़यामत ,
कबा = चोगा , अंगरखा ,
ख़ौफ़ = भय , डर , अंदेशे
खबा = छुपाना ,गोपनीयता, एकांत
नवा = आवाज़, सदा ,