Showing posts with label नई ग़ज़ल. Show all posts
Showing posts with label नई ग़ज़ल. Show all posts

Sunday, February 6, 2011

खूबसूरत हैं रियाया हिरनें

वार छुप छुप के किए जाते हैं
हम शिकारी हैं सच बताते हैं।

हर झपट्टा है पूरी ताक़त का
हम कभी मुफ़्त का ना खाते हैं।

खूबसूरत हैं रियाया हिरनें
भूख में हम ये भूल जाते हैं।

हम नहीं कहते कि डरकर रहिए
कब किसे आंख हम दिखाते हैं।

सारा जंगल है ख़ौफ़ का आलम
जो हैं गीदड़ वही बताते हैं।

हम सभी वक़्त के निवाले हैं
राहे दुनिया में आते जाते हैं।

मौक़ा ताक़त जुनूनोशौक़ोहवस
लफ़्ज़ सारे हमी बनाते हैं।।
06/07.02.11

Saturday, August 28, 2010

हुनर कुछ भी नहीं है बस ज़रा औज़ारबाज़ी है,

परिन्दे हौसलों के आसमां को नाप आते हैं।
जहां तूफ़ान ने तोड़ा वहीं पर घर बनाते हैं।।

गो गिद्धों से भरी है खौफ़ की बेदर्द ये दुनिया,
हंसी होंठों पै लेकर हम जहां को मुंह चिढ़ाते हैं।।

उन्हें हर बात पर दुनिया के मर मिटने की हसरत है,
नज़र जब इश्क़ की पड़ती है तो नज़रें चुराते हैं।।

मुझे वो चाहते हैं बस ज़रा कहने से डरते हैं ,
मुहब्बत तोड़ती है दिल , सहमकर दिल बचाते हैं।

हुनर कुछ भी नहीं है बस ज़रा औज़ारबाज़ी है,
तुम्हारे ख्वाब के सोने से हम गहने बनाते हैं।।

यक़ीन है दोस्ती पर ,पर जरा दुनिया से डरते हैं
ये दुनिया दोस्तों की है , मेरे दुश्मन बताते हैं।

न फूलों के हसीं गुलशन ,ना बागीचे ,न दहकां हैं ,
पड़े बंजर में ‘ज़ाहिद’ मौज़ के कौवे उड़ाते हैं।।



27.07.10, 5810, 5.8.10